छिंदवाड़ा में भ्रष्टाचार पर सर्जिकल स्ट्राइक , EOW ने बिछाया जाल ,आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा।

छिंदवाड़ जिले के नगर पालिका डोंगर परासिया कार्यालय में 17 फरवरी 2026 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर की टीम ने बड़ी ट्रैप कार्रवाई करते हुए एक अकाउंटेंट को 5000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। यह कार्रवाई कार्यालय परिसर में की गई, जिसके बाद पूरे विभाग में अचानक हलचल और प्रशासनिक सख्ती का माहौल बन गया।
सूत्रों के अनुसार आवेदक प्रार्थी लाल, पिता स्व. सुन्दर लाल पिंडपारोची निवासी कुम्हारी मोहल्ला वार्ड क्रमांक 16, परासिया जिला छिंदवाड़ा ने 13 फरवरी 2026 को EOW जबलपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि वह सफाई कर्मी के पद से अगस्त 2025 में सेवानिवृत्त हुआ था, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद भी उसे विभाग से मिलने वाला ग्रेच्युटी फंड और पेंशन भुगतान नहीं हुआ। आवश्यक भुगतान के लिए वह नगर पालिका डोंगर परासिया कार्यालय में पदस्थ अकाउंटेंट शैलेन्द्र शर्मा (उम्र 54 वर्ष) से लगातार संपर्क कर रहा था।
शिकायत के अनुसार अकाउंटेंट द्वारा ग्रेच्युटी फंड एवं पेंशन जारी कराने के एवज में कुल 25,000 रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी। आवेदक ने बताया कि उसमें से 20,000 रुपये पूर्व में आरोपी को दिए जा चुके थे तथा शेष 5,000 रुपये की मांग लगातार की जा रही थी। सत्यापन के दौरान आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने शिकायत को प्राथमिक जांच में सही पाया, जिसके बाद विधिवत ट्रैप योजना तैयार की गई।
निर्धारित योजना के तहत 17 फरवरी 2026 को EOW ट्रैप दल ने कार्यालय नगर पालिका डोंगर परासिया, जिला छिंदवाड़ा में कार्रवाई करते हुए आरोपी अकाउंटेंट शैलेन्द्र शर्मा को आवेदक से 5000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। ट्रैप के समय रिश्वत राशि विधिवत जब्त की गई तथा संबंधित दस्तावेज, जिनमें ग्रेच्युटी फंड और पेंशन से जुड़े अभिलेख शामिल हैं, भी जांच के लिए संकलित किए गए।
उल्लेख है कि आरोपी अकाउंटेंट उसी नगर पालिका के सेवानिवृत्त सफाई कर्मियों के फंड एवं पेंशन भुगतान संबंधी कार्यों में संलग्न था और भुगतान प्रक्रिया को लंबित रखकर कथित रूप से रिश्वत की मांग की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान समस्त कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई प्रारंभ की गई है।
इस कार्रवाई के बाद नगर पालिका कार्यालय में प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी गई है और कर्मचारियों के कार्यप्रणाली पर भी निगरानी की चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित भुगतान मामलों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं, वहीं आम नागरिकों में यह संदेश गया है कि रिश्वतखोरी के मामलों में एजेंसियां सक्रिय निगरानी रख रही हैं।
प्रभाव के दृष्टिकोण से यह मामला केवल एक ट्रैप कार्रवाई तक सीमित नहीं, बल्कि शासकीय कार्यालयों में लंबित भुगतान प्रक्रियाओं, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है, विशेषकर उन कर्मचारियों के लिए जो सेवानिवृत्ति के बाद अपने वैधानिक अधिकारों के भुगतान के लिए विभागीय प्रक्रियाओं पर निर्भर रहते हैं।
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