जुन्नारदेव नगर पालिका की संवेदनहीनता उजागर, वाहन के इंतज़ार में एक घंटे तक भटकता रहा मृतक का परिवार ।

भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की मिसाल बन चुकी जुन्नारदेव नगर पालिका परिषद ने एक बार फिर मानवता को शर्मसार कर दिया। वार्ड क्रमांक–3 में एक प्रतिष्ठित व्यापारी के आकस्मिक निधन के बाद नगर पालिका को समय रहते सूचना दिए जाने के बावजूद शव वाहन लगभग एक घंटे की देरी से मौके पर पहुंचा, जिससे शोकग्रस्त परिजन और अंतिम संस्कार में शामिल लोग विवश होकर इंतजार करते रहे।
इस संवेदनशील घड़ी में नगर पालिका की गैर-जिम्मेदार कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि मृत्यु जैसे गंभीर अवसर पर भी यदि व्यवस्था समय पर साथ न दे, तो इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता के अलावा और क्या कहा जाए।
- जीवितों को तो छोड़िए, मृतकों को भी चैन नहीं
भाजपा शासित जुन्नारदेव नगर पालिका परिषद अपनी कार्यशैली के कारण लगातार जनता के निशाने पर है। घटिया सामग्री की खरीदी, अपूर्ण निर्माण कार्य और विवादित भुगतान जैसे मामलों से घिरी यह परिषद अब मूलभूत मानवीय जिम्मेदारियों से भी मुंह मोड़ती नजर आ रही है।
चौंकाने वाली बात यह रही कि नगर पालिका में दो शव वाहन उपलब्ध होने के बावजूद, अध्यक्ष के ही वार्ड में हुई इस मृत्यु के बाद एक भी वाहन समय पर नहीं पहुंच पाया। यह लापरवाही उस समय और अधिक खटकती है, जब कुछ ही दूरी पर भाजपा पार्षद सुशासन पर भाषण देते नजर आए।
- विपक्ष मौन, नेतृत्व बेखबर
नगर पालिका की बिगड़ती व्यवस्था पर कांग्रेस के विपक्षी पार्षदों की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सत्ता और विपक्ष दोनों ही इस अव्यवस्था के मौन सहभागी बन चुके हैं। वहीं जिला भाजपा नेतृत्व की अनदेखी ने हालात को और बिगाड़ दिया है।
शहरवासियों का मानना है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों की परिषदें देख चुकी जनता अब इनसे दूरी बनाने लगी है। आने वाले नगरीय निकाय चुनाव में तीसरे मोर्चे की संभावनाएं इसी नाराजगी का संकेत दे रही हैं।
- शव वाहन कागजों में दौड़ते, ज़मीन पर नदारद
नगर पालिका में शव वाहनों के नाम पर हर वर्ष हजारों-लाखों रुपये के डीजल खर्च का हिसाब दर्शाया जाता है, जबकि हकीकत में आमजन को इनका लाभ नहीं मिल पाता। आरोप है कि पेट्रोल-डीजल की पर्चियां कुछ जनप्रतिनिधियों तक आसानी से पहुंच जाती हैं, जिससे शासकीय राशि के दुरुपयोग की आशंका और गहराती जा रही है।
संवेदनशीलता के अभाव और जवाबदेही से दूर यह व्यवस्था अब जनता के धैर्य की परीक्षा ले रही है।

















