छिंदवाड़ा : गो-माफिया के आगे बेबस व्यवस्था , एमपी में गो-हत्या, तस्करी और बीफ कारोबार पर सियासी मौन क्यों?

मेट्रो सिटी मीडिया छिंदवाड़ा/भोपाल।
गौवंश संरक्षण पर बड़ा खुलासा: मध्यप्रदेश में गो-हत्या, तस्करी और बीफ कारोबार पर मौन क्यों? उठे तीखे सवाल ।
मध्यप्रदेश में गौवंश संरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलकों में हड़कंप मच गया है। गौ-हत्या, मांस व चमड़ा निर्यात, गो-तस्करी और अघोषित कत्लखानों को लेकर गंभीर प्रश्न सामने आए हैं।
- क्या हुआ, कहाँ, कौन बोला।
अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद् के प्रांत अध्यक्ष राजू चरणागर ने प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित पूरे मध्यप्रदेश में गौवंश की बदहाल स्थिति पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बीते 20 वर्षों से राज्य और 12 वर्षों से केंद्र में सरकारें होने के बावजूद गौवंश की हालत लगातार चिंताजनक बनी हुई है।
- आरोप क्या हैं।
चरणागर जी के अनुसार, खुद को सनातनी कहने वाले कई नेता, बड़े हिंदू संगठन और कथित गौरक्षक संस्थाएं आज गौवंश को लावारिस छोड़ चुकी हैं। गौसेवा अब सेवा नहीं, बल्कि कुछ लोगों के लिए धंधा बनती जा रही है। प्रभावशाली संगठनों की चुप्पी इस पूरे तंत्र पर सवाल खड़े करती है।
- चौंकाने वाले तथ्य।
सूत्रों के हवाले से बताया गया कि देश में कभी गौवंश की 108 नस्लें थीं, लेकिन अब केवल 32 नस्लों का ही अस्तित्व बचा है। केवल बयानबाज़ी और भय का वातावरण बनाकर गौवंश का संरक्षण संभव नहीं है।
- असल गौसेवा कौन कर रहा।
राजू चरणागर जी ने कहा कि सीमित संसाधनों में काम कर रहे छोटे गौरक्षक दल, किसान और गोशालाएं ही आज वास्तविक रूप से गौवंश को बचाने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे सभी गोसेवकों के प्रयास सराहनीय हैं।
- प्रशासन और राजनीति पर सवाल।
प्रदेशभर में यह चर्चा तेज है कि गो-माफिया किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है? “गाय और गरीब” की राजनीति करने वाले जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन क्यों हैं?
- इलाके में असर।
इस बयान के बाद सामाजिक संगठनों और सनातनी समाज में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई स्थानों पर गौवंश संरक्षण को लेकर संगठित आंदोलन की मांग उठ रही है।

















