छिंदवाड़ा ताज़ा खबर: कम आवक पर मंडी बोर्ड की सख्त कार्यवाही छिंदवाड़ा कृषि उपज मंडी सचिव निलंबित, आय में भारी गिरावट बनी कारण।
छिंदवाड़ा मेट्रो सिटी मीडिया डेस्क
छिंदवाड़ा। 02 फरवरी 2026 को छिंदवाड़ा कृषि उपज मंडी में कम आवक और आय में लगातार गिरावट के मामले में मंडी बोर्ड ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए मंडी सचिव मनोज चौकिकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह आदेश मंडी बोर्ड के एमडी श्री कुमार पुष्पोनम द्वारा जारी किया गया, जिससे जिले के प्रशासनिक और कृषि महकमे में हलचल मच गई है।
सूत्रों के अनुसार, मंडी की आय और आवक की समीक्षा में पाया गया कि अप्रैल से दिसंबर 2024-25 की अवधि में, पिछले वर्ष 2023-24 की तुलना में **प्राथमिक आवक में 24.11 प्रतिशत** और **मंडी आय में 31.50 प्रतिशत** की गिरावट दर्ज की गई। वहीं अप्रैल से नवंबर 2025 की समीक्षा में स्थिति और गंभीर पाई गई, जहां मंडी फीस से होने वाली मासिक आय में **69.41 प्रतिशत** तथा प्राथमिक आय में **30.18 प्रतिशत** की कमी सामने आई।
मंडी बोर्ड मुख्यालय ने इस गिरावट को गंभीर मानते हुए पहले सचिव मनोज चौकिकर को **शो-कॉज नोटिस** जारी किया था। साथ ही समय-समय पर आवक बढ़ाने के स्पष्ट निर्देश भी दिए गए, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इन निर्देशों के बावजूद मंडी में अपेक्षित सुधार दर्ज नहीं हो सका। इसी को मंडी सचिव की **लापरवाही और कार्य के प्रति उदासीनता** मानते हुए मध्यप्रदेश राज्य मंडी बोर्ड सेवा विनियम 1998 के विनियम 35(1) के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई।
प्रशासनिक आदेश के तहत निलंबित सचिव मनोज चौकिकर को **मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, आंचलिक कार्यालय** में अटैच किया गया है। मंडी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करने की दिशा में की गई है।
हालांकि, इसी बीच जनवरी माह के आंकड़े चौंकाने वाले रहे। सूत्रों के अनुसार, मनोज चौकिकर के कार्यकाल में ही जनवरी 2026 में मंडी की आवक में **127 प्रतिशत की वृद्धि** दर्ज की गई। जहां पिछले वर्ष जनवरी में लगभग **साढ़े 7 लाख क्विंटल** आवक हुई थी, वहीं इस वर्ष जनवरी (बीते माह) में यह आंकड़ा बढ़कर **करीब साढ़े 16 लाख क्विंटल** तक पहुंच गया। इसके बावजूद, मंडी बोर्ड ने समग्र वार्षिक गिरावट और पूर्व चेतावनियों की अनदेखी को आधार बनाकर कार्रवाई को उचित ठहराया है।
इस कार्रवाई से छिंदवाड़ा कृषि उपज मंडी की कार्यप्रणाली पर सीधा असर पड़ा है। किसानों और व्यापारियों के बीच मंडी प्रबंधन की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर यह संदेश गया है कि आवक, आय और प्रदर्शन में लापरवाही पर अब सख्त कदम उठाए जाएंगे, चाहे आंकड़ों में आंशिक सुधार ही क्यों न दिखे।


















