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कृषक कल्याण वर्ष 2026: छिंदवाड़ा बना जलवायु अनुकूल खेती का मॉडल।

BISA और कृषि विभाग की पहल, बदल रही खेती की तस्वीर

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छिंदवाड़ा, 5 मार्च 2026। ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के तहत मध्यप्रदेश में खेती को लाभकारी और जलवायु अनुकूल बनाने की दिशा में छिंदवाड़ा जिला तेजी से मॉडल के रूप में उभर रहा है। Borlaug Institute for South Asia (BISA) और मध्य प्रदेश कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से आधुनिक कृषि अनुसंधान अब सीधे किसानों के खेतों तक पहुँच रहा है।

मोहखेड़ के चारगांव करबल में प्रक्षेत्र दिवस

गुरुवार को मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम चारगांव करबल में गेहूं की उन्नत एवं जलवायु अनुकूल किस्मों पर आधारित प्रक्षेत्र दिवस (फील्ड डे) आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मार्गदर्शन BISA के प्रबंध निदेशक डॉ. बी.एम. प्रसन्ना के नेतृत्व में हुआ। उद्देश्य था—अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित तकनीकों को स्थानीय किसानों तक व्यवहारिक रूप में पहुँचाना।

उन्नत किस्में और तीन बुवाई पद्धतियों का प्रदर्शन

तकनीकी सहायक श्री दीपेंद्र सिंह ने किसानों को गेहूं की नवीन किस्मों—HI-1636, DBW-303, DBW-327 और DBW-187—की विशेषताओं से अवगत कराया। खेत पर ही तीन अलग-अलग बुवाई पद्धतियों का प्रदर्शन किया गया:

सुपर सीडर पद्धति

जीरो टिलेज (शून्य जुताई)

पारंपरिक बुवाई पद्धति

किसानों को प्रत्यक्ष तुलना के माध्यम से लागत, उत्पादन और संसाधन उपयोग का अंतर समझाया गया, ताकि वे वैज्ञानिक आधार पर निर्णय ले सकें।

जीरो टिलेज से प्रति एकड़ ₹2500 तक की बचत

ग्राम चारगांव करबल के प्रगतिशील किसान रघुवर भादे ने बताया कि जीरो टिलेज तकनीक अपनाने से उन्हें प्रति एकड़ लगभग ₹2500 की सीधी बचत हुई।

सिंचाई जल की खपत में कमी

बीज की मात्रा लगभग आधी

पराली जलाने की समस्या में राहत

उनके अनुसार, यह पद्धति लागत घटाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है।

योजनाओं और प्राकृतिक खेती पर मार्गदर्शन

कार्यक्रम में कृषि विभाग और आत्मा परियोजना के अधिकारियों ने भी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री डी.एस. घाघरे ने शासकीय योजनाओं का ब्यौरा दिया। आत्मा परियोजना की बीटीएम श्रीमती प्रिया कराडे ने प्राकृतिक खेती के लाभ समझाए, जबकि कृषि विस्तार अधिकारी श्री बी.एल. सरेआम ने प्रभावी नरवाई प्रबंधन के उपाय बताए।

किसानों में उत्साह, टिकाऊ खेती की ओर कदम

प्रक्षेत्र दिवस में क्षेत्र के कई कृषकों और एफपीओ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। खेत में तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन देखने के बाद किसानों ने आधुनिक पद्धतियाँ अपनाने में रुचि दिखाई।

विशेषज्ञों का मानना है कि BISA और कृषि विभाग के समन्वित प्रयासों से छिंदवाड़ा में जलवायु अनुकूल खेती का सशक्त मॉडल विकसित हो रहा है। ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के दौरान ऐसे कार्यक्रम खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में निर्णायक साबित हो रहे हैं।

 


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