नगर निगम परासिया रोड कचरा घर में मारपीट का आरोप: जेसीबी चालक की शिकायत पर मेंटेनेंस प्रभारी पर केस दर्ज।
🔴 छिन्दवाड़ा मेट्रो सिटी मीडिया डेस्क |
छिंदवाड़ा शहर के परासिया रोड स्थित नगर निगम के कचरा घर में रविवार सुबह लगभग 10:30 बजे मारपीट का मामला सामने आया, जिसमें निगम के एक जेसीबी चालक के साथ कथित रूप से वाहन मेंटेनेंस प्रभारी द्वारा मारपीट किए जाने की शिकायत दर्ज की गई है। घटना के बाद पीड़ित ने सीधे कोतवाली थाना पहुंचकर शिकायत दी, जिस पर पुलिस ने मामला पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता सुरज मोकालगाये के अनुसार वह नियमित ड्यूटी के तहत कचरा वाहन खाली करने कचरा घर पहुंचा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात निगम के वाहनों के मेंटेनेंस का कार्य देखने वाले विकास मराठा से हुई। पीड़ित का आरोप है कि उसने जेसीबी के मेंटेनेंस को लेकर चर्चा की, जिस पर विकास मराठा कथित रूप से भड़क गया, अभद्र भाषा का प्रयोग किया और विरोध करने पर हाथापाई शुरू कर दी।
मामले की सूचना कोतवाली पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी विकास मराठा के विरुद्ध बीएनएस की धारा 296(ए), 115(2) एवं 351(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार घटना की जांच की जा रही है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सके।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी कुछ माह पूर्व ही निगम में कार्य से जुड़ा है और वह कथित रूप से वाहन शाखा प्रभारी मंगेश पवार का रिश्तेदार बताया जा रहा है। इसी आधार पर उसे निगम के वाहनों के मेंटेनेंस का जिम्मा मिलने को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि मेंटेनेंस से जुड़े मुद्दों पर बार-बार टालमटोल की जाती थी और कर्मचारियों के साथ व्यवहार ठीक नहीं था।
प्रशासनिक स्तर पर अभी तक निगम अधिकारियों की ओर से आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, जबकि मामला पुलिस जांच में है। कोतवाली पुलिस का कहना है कि चिकित्सीय परीक्षण, बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद निगम कर्मचारियों के बीच असंतोष और चर्चा का माहौल देखा जा रहा है।
इस घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली, आंतरिक अनुशासन और नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े किए हैं। यदि आरोपों में रिश्तेदारी और पद के दुरुपयोग के तत्व सामने आते हैं, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर विषय बन सकता है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल और व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।


















