कर्मचारियों की मांगों और आंदोलन को हल्के में ना ले सरकार
बड़ा मुद्दा है पुरानी पेंशन की बहाली , देश के 6 राज्यो में हो चुकी है लागू

अधिकारी – कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने सरकार को चेताया ..
छिन्दवाड़ा – पुरानी पेंशन बहाली सहित कर्मचारियों की 24 सूत्रीय मांगों को लेकर अधिकारी – कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के आंदोलन को सरकार हल्के में ना ले देश के आधा दर्जन राज्य पेंशन बहाली लागू कर चुके हैं किंतु मध्यप्रदेश की सरकार कर्मचारी हितों से मुंह फेर बैठी है मध्यप्रदेश में किसान के बाद अधिकारी – कर्मचारी ही सबसे बड़ा वोट बैंक है प्रदेश के कर्मचारी सरकार की बेरुखी से आक्रोशित है सरकार यह ना भूले कि यह आंदोलन चुनावी वर्ष में हो रहे हैं चुनावी वर्ष में होने वाले आंदोलन के अपने मायने होते हैं गुरुवार को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन में मोर्चा के कर्मचारी नेताओ ने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में सीधे यह बात कह दी है मोर्चा एक नही दर्जनों बार आंदोलन कर चुका है किंतु सरकार कर्मचारियों की मांगों को लेकर गम्भीर नही है गुरुवार को आंदोलन के दौरान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सतीश गोंडाने ने कहा कि प्रदेश के साढ़े सात लाख से ज्यादा अधिकारी – कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली की बाट जोह रहे हैं इतना ही नही सरकार ने पिछले 6 सालों से पदोन्नत्ति भी नही दी और 30 हजार से ज्यादा अधिकारी – कर्मचारी बिना पदोन्नत्ति के ही रिटायर हो गए हैं सरकार ने कर्मचारी हितों के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी नही माना हैं शासन को कोई आर्थिक भार भी नहीं उठाना पड़ रहा है फिर भी शासन इस ओर ध्यान नहीं दे रही है उन्होंने कहा कि किसानों के बाद कर्मचारी वर्ग मध्यप्रदेश शासन का सबसे बड़ा वोट बैंक है सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन कर्मचारी – अधिकारी ही करते हैं सरकार की योजनाओं को फेल – पास करने की ताकत के साथ ही योजनाओं के प्रति माहौल बनाने का काम भी कर्मचारी करते हैं प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों में कर्मी और उनके परिजन परिणाम प्रभावित करने की ताकत रखते हैं सरकार का कर्तव्य है कि वह कर्मचारी की समस्याओं को पूर्ण करने की जिम्मेदारी का समय रहते निर्वहन करे कर्मचारियों पुरानी पेंशन बहाल करे, पदोन्नति के आदेश जारी करें और शेष मांगों को पूर्ण करें अन्यथा कर्मचारी बड़े स्तर पर आंदोलन के लिए तैयार है
रैली निकालकर किया प्रदर्शन ..
अधिकारी – कर्मचारी मोर्चा ने जिला मुख्यालय में रैली निकाली कलेक्ट्रेट मैदान के सामने धरना प्रदर्शन किया और कलेक्ट्रेट आकर गेट पर जमकर नारेबाजी कर मुख्यमंत्री के नाम अपनी मांगों का ज्ञापन जिला प्रशासन को दिया है आंदोलन में कर्मचारी नेता रमेश शर्मा हेमंत चांद , प्रमोद कुमार शर्मा डॉक्टर एम के मौर्य डॉ नागेंद्र सूर्यवंशी, संजय भावरकर ,कुलदीप मोखल गाय दयालाल डेहरिया अजय डेहरिया इंजीनियर एसबी इवनाती, किशोर साहू सजीर कादरी राजीम कुरेशी विनोद डेहरिया अरविंद भट्ट नारायण डाकने संजीव कपाले सहित 63 कर्मचारी संगठनों के जिला अध्यक्ष पदाधिकारी व सदस्य मौजूद थे
ये है मोर्चा की प्रमुख मांगे ..
पुरानी पेंशन बहाली औऱ पदोन्नत्ति सहित मोर्चा की मांगों में मुख्य रूप से राज्य के कर्मचारियों अधिकारियों पेंशनरों को महंगाई भत्ते का भुगतान , कर्मचारियों की कई वर्षों से वेतन विसंगति एवं मंत्रालय के समान वेतनमान समान कार्य समान वेतन पंचायत सचिव ,स्थाई कर्मी अनुदान प्राप्त शालाओं के शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ , दैनिक वेतन भोगी संविदा कर्मचारी स्वास्थ्य संविदा कर्मियों स्थाई कर्मियों के रिक्त पदों पर नियमितीकरण ,चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदनाम वेतनमान सुधार पटवारियों का ग्रेड पे 2800 किए जाने, सभी विभागों में समय मान वेतनमान का लाभ पदोन्नत वेतनमान दिए जाने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ,कोटवारों को नियमित वेतन का लाभ ,आशा कार्यकर्ताओं को 10000 मानदेय दिए जाने अतिथि शिक्षक विधान शिक्षक एवं आउटसोर्स कर्मियों को नियमित करने स्वास्थ्य विभाग निर्माण विभाग के कर्मचारी आयुष विभाग के कर्मचारी शिक्षा विभाग आदिवासी विभाग के कर्मचारियों की मांगे को पूरा करने की मांग पुनः रखी गई है इनको लेकर 5 फरवरी को मोर्चा भोपाल में प्रदेश व्यापी आंदोलन भी करेगा

















