धर्म, संस्कृति और अध्यात्म की त्रिवेणी!,गुरु गोविंद सिंह जी की नगरी को निकला श्रद्धालुओं का जत्था, शहर में गूंजे जयकारे।

हज़ूर साहिब के दर्शन हेतु जुन्नारदेव से श्रद्धालुओं का जत्था रवाना
मेट्रो सिटी मीडिया डेस्क जुन्नादेव।
पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के नांदेड़ में स्थित सिख पंथ के दसवें गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी का पावन तख्त श्री हज़ूर साहिब न केवल सिख समाज, बल्कि सनातन धर्म, पंजाबी एवं सिंधी समुदाय के श्रद्धालुओं के लिए भी गहन आस्था का केंद्र है। सिख पंथ के पाँचवें तख्त के रूप में प्रतिष्ठित हज़ूर साहिब का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है।
नगर जुन्नारदेव से लगभग 63 श्रद्धालुओं का एक जत्था बुधवार प्रातः तीन दिवसीय धार्मिक यात्रा पर हज़ूर साहिब, नांदेड़ के दर्शन हेतु एक बस द्वारा रवाना हुआ। इस श्रद्धालु दल में महिलाएँ, बुज़ुर्ग, युवा एवं बच्चे सम्मिलित हैं। जत्था गुरुवार को नांदेड़ पहुँचकर श्री हज़ूर साहिब में विशेष शब्द-कीर्तन एवं अरदास करेगा। इसके उपरांत श्रद्धालु नांदेड़ सहित आसपास के क्षेत्र में स्थित विभिन्न गुरुद्वारों एवं धार्मिक स्थलों के दर्शन कर अपनी आध्यात्मिक अनुभूति को और सुदृढ़ करेंगे।
यह धार्मिक यात्रा श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा, जुन्नारदेव के प्रमुख ग्रंथी सरदार राजपाल सिंह के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में सम्पन्न हो रही है।
- श्रद्धालुओं को दी गई भावभीनी विदाई
हज़ूर साहिब के पावन दर्शन हेतु रवाना हो रहे श्रद्धालुओं को विदा करने के लिए बुधवार प्रातः गुरुद्वारा परिसर में नगर के सम्मानित नागरिकों एवं श्रद्धालुओं के परिजनों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। इस अवसर पर गुरुद्वारा साहिब में अरदास सम्पन्न हुई, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं को शाल, श्रीफल एवं पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। श्रद्धा और भावनाओं से परिपूर्ण वातावरण में श्रद्धालु अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए।
- मार्ग में हुआ भव्य स्वागत और सम्मान
जुन्नारदेव से नांदेड़ रवाना हुए इस 63 सदस्यीय श्रद्धालु दल का मार्ग में विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया। बैतूल जिले के सारणी, बगडोना, घोड़ाडोंगरी एवं बैतूल में सिख समुदाय के साथ-साथ सनातन धर्मावलंबियों द्वारा श्रद्धालुओं का आत्मीय अभिनंदन किया गया।
श्रद्धालुओं को शाल, श्रीफल एवं पगड़ी भेंट कर सम्मानित किया गया तथा गुरुद्वारों में अटूट लंगर में सहभागिता भी कराई गई। जगह-जगह हुए इस स्नेहपूर्ण स्वागत से श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ और उनकी आस्था एवं श्रद्धा और अधिक प्रगाढ़ हुई।

















