छिंदवाड़ा : चौरागढ़ की चोटियों पर आज शोक,सतपुड़ा की साधना मौन हुई, ब्रह्मलीन हुए गरीब दास बाबा।

चौरागढ़ महादेव के अनन्य उपासक परम पूज्य गरीब दास बाबा ब्रह्मलीन
मेट्रो सिटी मीडिया डेस्क | पचमढ़ी | 07 जनवरी 2026
सतपुड़ा की पावन वादियों से आज एक अत्यंत दुःखद समाचार सामने आया है। चौरागढ़ महादेव के अनन्य उपासक, सिद्ध संत और पचमढ़ी की आध्यात्मिक पहचान परम पूज्य गरीब दास बाबा (गरीब बाबा) आज ब्रह्मलीन हो गए। उनके देहांत की सूचना मिलते ही पचमढ़ी सहित संपूर्ण क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
गरीब दास बाबा केवल एक संत नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या और त्याग का जीवंत प्रतीक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भगवान शिव की आराधना, कठिन तप और दीन-दुखियों की सेवा में समर्पित कर दिया। बाबा मुख्य रूप से चौरागढ़ शिखर (लगभग 1326 मीटर ऊंचाई) पर निवास करने वाले संत के रूप में विख्यात थे और क्षेत्र के सिद्ध संतों में उनकी विशेष पहचान थी।
चौरागढ़ की दुर्गम पहाड़ियों पर शिवभक्ति की अलख जगाने और त्रिशूल अर्पण की परंपरा को जीवंत बनाए रखने में बाबा की भूमिका अविस्मरणीय रही। पचमढ़ी आने वाले बड़े-बड़े संत, साधक और श्रद्धालु कठिन चढ़ाई तय कर बाबा से आशीर्वाद लेने पहुंचते थे। पावन धारा क्षेत्र में उन्हें एक सिद्ध तपस्वी के रूप में श्रद्धा से स्मरण किया जाता था।
उनकी कठोर तपस्या, एकांत साधना और ऊंचाइयों में निवास आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आज सतपुड़ा की वह आवाज़ शांत हो गई, जो हर क्षण “हर-हर महादेव” का जप करती थी। बाबा का भौतिक शरीर भले ही हमारे बीच न हो, किंतु चौरागढ़ की चोटियों पर गूंजता उनका नाम और उनकी शिक्षाएं सदा अमर रहेंगी।
बाबा के महाप्रयाण पर संत समाज, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों ने अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की है। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके अनुयायियों को यह असीम दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
“शांत हो गया सतपुड़ा का वह स्वर, जो हर पल ‘हर-हर महादेव’ जपता था। बाबा का भौतिक शरीर भले ही हमारे बीच न हो, लेकिन उनकी दी हुई शिक्षाएं और चौरागढ़ की चोटियों पर गूंजता उनका नाम सदैव अमर रहेगा।”
ॐ शांति शांति शांति
परख मुकुंद सोनी।

















