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500 साल के इंतजार के बाद अयोध्या में बना भव्य मंदिर, विराजे रामलला, पूरे देश मे मनाया गया उत्सव

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भारत हिन्दू राष्ट्र में  हिंदुओ को बलिदान के साथ 500 साल तक अपने आराध्य भगवान श्री राम की जन्म भूमि अयोध्या में श्री राम मन्दिर का पुनः निर्माण करने के लिए 500 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा है। लोकशाही के पहले  भारत की श्री राम जन्म भूमि अयोध्या के श्री राम मंदिर को सन 1528 में  मीर बाकी ने   तोड़कर बाबरी मस्जिद  बनाई थी। इस दौर में जो संघर्ष हुआ उसमें तीन लाख से ज्यादा हिन्दू मारे गए थे। भारत मे आजादी के बाद स्थापित लोकतंत्र में 1949 में एफ़ आई आर और अदालती लड़ाई के बीच 6 दिसम्बर 1992 को कार सेवा में मन्दिर के ऊपर बना बाबरी ढांचा तोड़ा गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के 19 नवम्बर 2019 के  फैसले के मोदी सरकार ने ट्रस्ट बनाकर 5 अगस्त 2020 को श्री राम मंदिर की आधारशिला रखी थी। 22 जनवरी 2023 को नव- निर्मित भव्य दिव्य  मन्दिर में रामलला विराजमान हुए हैं। भगवान श्री राम की जन्म भूमि पर बाबरी मस्जिद कलंक थी।इसके लिए संघर्ष जारी रहा और देश की आजादी के बाद आई लोकशाही में भी सरकार इसका हल नही निकाल पाई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हिंदुओं का यह सपना सच हो पाया है।

22 जनवरी 2023 को नव्य- दिव्य अयोध्या में श्री राम जन्म भूमि में  नव- निर्मित श्री राम मन्दिर में  राम लला की मूर्ति को देश व्यापी उत्सव के साथ प्राण- प्रतिष्ठित कर अयोध्या से देश के नए अध्याय का श्री गणेश किया गया है। इस अवसर पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए प्रधान मंन्त्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे धैर्य,बलिदान, त्याग, तपस्या के बाद राम आ गए हैं। अब राम टेंट में नही इस दिव्य मन्दिर में रहेंगे। ये नए कालचक्र का उदय है। यह मंदिर हमारे सदियों की धैर्य की धरोहर है। अतीत से हौसला लेता राष्ट्र ही नव इतिहास का सृजन करता है। हमे आज से आने वाले एक हजार साल की नींव रखनी है।समर्थ ,सक्षम, भव्य, दिव्य भारत का निर्माण करना है।राम के विचार मानस के साथ- साथ जनमानस में हो यही इसकी सीढ़ी है।

उन्होंने कहा कि चेतना का विस्तार राम से राष्ट्र तक होना चाहिए।यही देव से देश और राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार करेगा।उन्होंने कहा कि राम आग नही राम ऊर्जा है। जो लोग कहते थे राम मंदिर  बनने से देश मे आग लग जाएगी वे भारत के जनमानस को समझ नही पाए।यह भारतीय संस्कृति की प्राण- प्रतिष्ठा है। भारत के मूल्यों और आदर्शो की प्राण-  प्रतिष्ठा है। यह केवल देव मन्दिर नही बल्कि भारत की राष्टीय चेतना का राष्ट्र मन्दिर है। राम भारत के आधार , चेतना, चिंतन, प्रतिष्ठा, प्रवाह, प्रभाव, नेति, नीति,निरंतरता ही नही विश्व और विश्वात्मा है।

उन्होंने कहा कि इतने सालों तक मन्दिर का निर्माण नही ही पाया। हम में ही कोई कमी रह गई होगी भारत जे संविधान की पहली प्रति में ही राम विराजमान है।इसके बावजूद राम के अस्तित्व को लेकर दशकों तक हमे अस्तित्व की लड़ाई लड़ना पडा है। भारत की न्याय पालिका ने संविधान की लाज रख ली। न्यायप्रिय तरीके से बना यह मंदिर विजय का नही विनय जो राष्ट्र अपने इतिहास की गांठो में उलझ जाते हैं वे उन्नति नही कर पाते हैं। भारत मे हर युग मे लोगो ने राम को जिया है। जिसमे रम जाए राम उसी में है। राम के लंबे वियोग से जो विपत्ति आई अब उसका अंत हो गया है।अब भारत मे नए कालचक्र की शुरुआत हो रही हैं।

समारोह को संघ प्रमुख मोहन भागवत, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राम मंदिर ट्रस्ट के गोविंद गिरी ने भी सम्बोधित किया। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दिन काल चक्र पर अमिट स्मृति रेखा है। त्रेतायुग में राम का वियोग केवल 14 वर्ष का था तब ही असहनीय था। इस कालखंड में सैकड़ों वर्षों का वियोग सहा है। आज पूरी दुनिया अयोध्या के वैभव को निहार रही है।यह मन्दिर  लोक आस्था और जनविस्वास का प्रतीक है।यह राष्ट्रीय गौरव और भारत के सांस्कृतिक जागरण का अवसर है। दिव्य – नव्य अयोध्या में अब गोलियां नही चलेगी ना ही कर्फ्यू लगेगा। अब यहां दीपोत्सव होगा रकाम उत्सव होगा। यह अवध पूरी से राम राज्य के स्थापना की उद्घोषणा है। भेदभाव रहित समृद्ध समाज और भारत के निर्माण का यह अवसर है।अयोध्या में एयरपोर्ट, फोर लेन सड़के और सरयू में क्रूज चल रहे हैं। अयोध्या अवनी की अमरावती है। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के  विधान में शामिल हुए। विधान पूरा होते ही रामलला की प्रतिमा के पूरे विश्व ने दर्शन किए। विधान के लिए इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  11 दिन का कठिन व्रत रखा था।


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