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अंतरराष्ट्रीय मंच पर छिंदवाड़ा की रामलीला , भरत-राम मिलाप ने बहाए आसू, अभिनय नहीं , अनुभूति बनी छिंदवाड़ा की रामलीला।

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मेट्रो सिटी मीडिया डेस्क

 

जबलपुर / छिंदवाड़ा

विश्व रामायण सम्मेलन के समापन अवसर पर छिंदवाड़ा की ऐतिहासिक श्रीरामलीला ने अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर अपनी अनुपम छाप छोड़ी। भारत सहित विभिन्न देशों की रामलीला प्रस्तुतियों के बीच छिंदवाड़ा की रामकथा ने भावनाओं का ऐसा प्रवाह रचा कि दर्शक दीर्घा श्रद्धा, मौन और अश्रुओं से भर उठी।

इस भव्य सम्मेलन में देश के विविध प्रांतों के साथ-साथ इंडोनेशिया और मणिपुर की प्रसिद्ध रामलीलाओं ने सहभागिता की, किंतु समापन के लिए आमंत्रित श्रीरामलीला मंडल छिंदवाड़ा की प्रस्तुति दर्शकों के हृदय में स्थायी स्मृति बन गई।

दशरथ की पीड़ा ने रचा करुण इतिहास

रामलीला का प्रारंभ राजा दशरथ के देहत्याग प्रसंग से हुआ, जिसने मंच से लेकर दर्शक दीर्घा तक गहन संवेदना का वातावरण बना दिया। दशरथ की भूमिका में मुख्य निर्देशक श्रांत चंदेल ने पुत्र-वियोग, आत्मसंघर्ष और अंतर्मन की पीड़ा को जिस संयम और गहराई से प्रस्तुत किया, उसने श्रोताओं को स्तब्ध कर दिया।

भरत का आक्रोश, त्याग और धर्मबोध

अयोध्या आगमन के प्रसंग में भरत के चरित्र ने मंच पर नैतिक चेतना को मुखर किया। ऋषभ स्थापक ने भरत की आत्मग्लानि, भ्रातृप्रेम और राजसत्ता के प्रति विरक्ति को प्रभावशाली संवादों और सशक्त भावाभिनय से जीवंत कर दिया।

कैकेयी के रूप में धीरज डेहरिया ने कठोरता और अंतर्निहित पश्चाताप को संतुलित अभिनय से प्रस्तुत कर दृश्य को और मार्मिक बना दिया।

मातृत्व, करुणा और मर्यादा का संगम

माता कौशल्या की भूमिका में अभिनव शुक्ला ने धैर्य, पीड़ा और ममता को अत्यंत संवेदनशील ढंग से उभारा। भरत-कौशल्या मिलन ने दर्शकों को भावनाओं के सागर में डुबो दिया। इसके पश्चात चित्रकूट गमन के दृश्य में त्याग और कर्तव्य की भावना और प्रखर हो उठी।

लोकभाव और राजधर्म का सजीव चित्रण

सुमंत के रूप में राजू माहोरे ने निष्ठा और सेवाभाव को सहजता से प्रस्तुत किया। निषादराज की भूमिका में बाबुल सिंगारे ने लोकसंवेदना और आत्मीयता से कथा को जनमानस से जोड़ा।

राजा जनक के रूप में नीरज चौरसिया ने गरिमा और राजधर्म का प्रभावशाली चित्रण किया।

भरत-राम मिलाप बना भावनात्मक शिखर

कार्यक्रम का उत्कर्ष राम-भरत मिलाप में देखने को मिला।

श्रीराम की भूमिका में रजत पांडेय ने करुणा, संयम और मर्यादा को सजीव किया, जबकि नंगे पांव भरत बने ऋषभ स्थापक का समर्पण दर्शकों की आँखों को नम कर गया।

लक्ष्मण के रूप में आयुष शुक्ला, शत्रुघ्न बने रुद्रांश राजपूत, सीता की भूमिका में स्वास्तिक शर्मा, सुमित्रा बनी सार्थक राजपूत और वशिष्ठ के रूप में श्रीकांत द्विवेदी ने अपने-अपने चरित्रों को पूर्ण गरिमा प्रदान की।

अंतरराष्ट्रीय सराहना, छिंदवाड़ा को गौरव

देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों ने छिंदवाड़ा की रामलीला को अभिनय नहीं बल्कि रामकथा की जीवंत अनुभूति बताया।

वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के डॉ. अखिलेश गुमास्ता एवं विधायक अजय विश्नोई ने कहा कि यह प्रस्तुति छिंदवाड़ा की सांस्कृतिक परंपरा का विश्व मंच पर गौरवपूर्ण उद्घोष है।

कलाकारों का सम्मान, छिंदवाड़ा गौरवान्वित

छिंदवाड़ा से पहुंचे सैकड़ों दर्शकों की उपस्थिति में श्रीरामलीला मंडल के सभी कलाकारों एवं समिति सदस्यों का वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधियों द्वारा भव्य सम्मान किया गया।

इस अवसर पर संरक्षक कस्तूरचंद जैन, राजू चरणागर, सतीश दुबे, अध्यक्ष अरविंद राजपूत, सचिव राजेंद्र आचार्य सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।


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