फ्लाईओवर के नीचे लगी आग, लाखों का नुकसान—जांच के घेरे में सौंदर्यकरण
भोपाल।
शहर के प्रमुख चौराहों में शामिल लालघाटी फ्लाईओवर शुक्रवार रात अचानक उस वक्त सुर्खियों में आ गया, जब इसके नीचे किए गए सौंदर्यकरण कार्य में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज़ थी कि कुछ ही मिनटों में फ्लाईओवर के नीचे लगे एसीपी (एल्यूमिनियम कंपोज़िट पैनल), लाइट पोल और आसपास पड़े कचरे को अपनी चपेट में ले लिया।
आग लगते ही क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते धुएं का गुबार छा गया और कोहेफिज़ा से बैरागढ़ जाने वाला मार्ग प्रभावित हो गया। सुरक्षा कारणों से एक तरफ का ट्रैफिक पूरी तरह रोकना पड़ा, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
तीन दमकलों ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलते ही बैरागढ़ और फतेहगढ़ फायर स्टेशन से दमकल वाहन मौके पर पहुंचे। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
फायर ब्रिगेड के अनुसार, आग सबसे पहले फ्लाईओवर के नीचे लगाए गए प्लाईवुड और एसीपी पैनल में लगी, जो पास में पड़े कचरे के कारण तेजी से फैल गई।
- आग की वजह अब भी रहस्य
फायर फाइटर्स ने बताया कि आग लगने का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि सड़क किनारे पड़े कचरे या किसी चिंगारी से आग भड़की, जिसने सौंदर्यकरण सामग्री को चपेट में ले लिया।
हालांकि राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन सौंदर्यकरण कार्य को भारी नुकसान पहुंचा है।
- करोड़ों की लागत वाला सौंदर्यकरण सवालों के घेरे में
फ्लाईओवर के नीचे एसीपी शीट, सीएनसी पेंटिंग और आकर्षक लाइटिंग लगाकर इसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाने का दावा किया गया था। कहा गया था कि यह सौंदर्यकरण 10 साल तक सुरक्षित रहेगा, लेकिन कुछ ही समय में आग की घटना ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह कार्य नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा कराया गया था। इससे पहले नगर निगम और अन्य एजेंसियां भी यहां पेंटिंग करा चुकी थीं, जो समय से पहले खराब हो गई थीं।
- बड़ा सवाल: सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं?
शहरवासियों में अब यह सवाल गूंज रहा है कि—
क्या सौंदर्यकरण सामग्री फायर-सेफ थी?
क्या कचरा प्रबंधन में लापरवाही बरती गई?
और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं से सबक लिया जाएगा?
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