छिंदवाड़ा : गेहूं – चावल की तरह मक्का खरीद की जरूरत , किसानों को मिलेगा उचित मूल्य : सांसद विवेक बंटी साहू ।

सांसद बंटी विवेक साहू ने एफसीआई बैठक में रखा किसानों का पक्ष
छिंदवाड़ा | मेट्रो सिटी मीडिया
छिंदवाड़ा जिले में देश का सर्वाधिक मक्का उत्पादन होने के बावजूद किसानों को आज भी अपनी फसलों के सुरक्षित भंडारण और उचित मूल्य के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर सांसद बंटी विवेक साहू ने चेन्नई में आयोजित भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की बैठक में साइलो व्यवस्था को लेकर स्पष्ट और ठोस मांग रखी।
सांसद साहू ने बताया कि उनके लोकसभा क्षेत्र में किसानों के लिए फसलों के भंडारण हेतु साइलो की कोई स्थायी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। हाल ही में अस्थायी रूप से खेतों में बनाई गई बोरियों की साइलो व्यवस्था भी बंद हो चुकी है, जिससे किसानों को फसल खराब होने और अतिरिक्त हमाली खर्च का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि साइलो की समुचित व्यवस्था की जाए तो किसान अपनी फसलें सुरक्षित रूप से रख सकेंगे, जिससे न केवल बारिश और नमी से होने वाले नुकसान से बचाव होगा बल्कि परिवहन और हमाली लागत में भी कमी आएगी।
बैठक के दौरान सांसद बंटी विवेक साहू ने यह भी बताया कि छिंदवाड़ा और पांढुर्ना जिले के आदिवासी अंचलों में मक्का के साथ-साथ मिलेट्स (ज्वार, बाजरा एवं अन्य पोषक अनाज) का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है, लेकिन किसानों को इन फसलों के लिए न तो उचित मूल्य मिल पा रहा है और न ही सशक्त विपणन व्यवस्था उपलब्ध है।
सांसद ने एफसीआई से मांग की कि जिस प्रकार गेहूं और चावल की खरीद की जाती है, उसी तर्ज पर मक्का और मिलेट्स की भी सीधी खरीद सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल सके। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश में कुपोषण समाप्त करने में मिलेट्स की महत्वपूर्ण भूमिका है, ऐसे में इन फसलों को बढ़ावा देना समय की मांग है।
सांसद साहू ने बताया कि संसद की प्रमुख स्थायी समिति उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण की बैठकें दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में लगातार आयोजित की जा रही हैं, जिनमें वे सक्रिय रूप से भाग लेकर किसानों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठा रहे हैं।
इसी क्रम में सांसद बंटी विवेक साहू छह दिवसीय प्रवास पर चेन्नई, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में समिति के साथ विभिन्न निरीक्षण एवं बैठकों में सहभागिता कर रहे हैं, जहां खाद्य भंडारण, वितरण व्यवस्था और उपभोक्ता हितों से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा की जा रही है।

















