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नारी की “लाज” धर्म के लिए “युध्द” और गीता ज्ञान के लिए “ड्रेस” नही बच्चो को कृष्ण के संस्कार की जरूरत – पंडित प्रदीप मिश्रा

छिन्दवाड़ा के सिमरिया हनुमान धाम में शिवमहापुराण कथा में उमड़ा श्रद्धालुओ का सैलाब

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♦ छिन्दवाड़ा मध्यप्रदेश-

अपने बच्चों को कृष्ण ड्रेस पहनाए ना पहनाए लेकिन उन्हें ” भगवान श्री कृष्ण” के “संस्कार” जरूर दे। ताकि बच्चे अपने संस्कारो से भगवान कृष्ण की तरह नारी की “लाज” रख सके।गीता ज्ञान के ज्ञानी हो सके। धर्म के लिए “लड़ाई” और ” युद्ध” कर सके। उन्होंने कहा कि “महाभारत” का युद्ध भी ” भगवान श्री कृष्ण” के साक्षी में हुआ था। संस्कार से वर्तमान जीवन ही नही आने वाली पीढ़ी भी सफल हो जाएगी।

यह बात शिवमहापुराण वेत्ता कुबरेश्वर धाम के निर्माता “पंडित प्रदीप मिश्रा” ने छिन्दवाड़ा के सिमरिया हनुमान धाम में आयोजित पांच दिवसीय “शिवमहापुराण” कथा के महा आयोजन में “श्री कृष्ण जन्म” अष्टमी के अवसर पर कही। कथा के “यजमान” पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और सांसद नकुलनाथ हैं। यह कथा छिन्दवाड़ा के इतिहास की सबसे बड़ी कथा है। कथा पंडाल में रोज दो से तीन लाख लोग पहुंचते हैं। इस अवसर पर “सिमरिया हनुमान धाम” का नजारा “महाकुंभ” की तरह है। श्रद्धालु यहां तीन वाटर प्रूफ पंडाल के बाहर तक है और वाहनो का रेला तो सिमरिया से लिंगा रिन रोड तक नजर आता है।

पंडित प्रदीप मिश्रा ने तीसरे दिन आज कथा में कहा कि भक्ति के लिए बुढ़ापे का इंतजार ना करे।भक्ति ही है जो आपको मुक्ति के द्वार पर ले जाएगी।उन्होंने सोलह सोमवार व्रत के महात्म्य पर बोलते हुए कहा कि “सुगंधा” को स्वयं भगवान “शिव” ने उज्जैन महाकाल में पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर व्रत के बारे में बताया था। भगवान शिव ने कहा था कि 16 सोमवार के व्रत से धन ,वैभव, संपदा से लेकर “अमृत” तक की प्राप्ति होती है। जैसे “चंद्रमा” की 16 कला में सबकुछ है वैसे ही 16 सोमवार के व्रत में भी सबकुछ है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर ” भगवान” अपने मूल स्वरुप में नही आते बल्कि “मनुष्य” रूप में ही आते हैं। पीपल का वह वृक्ष आज भी महाकाल में है जिसे “पिपलेश्वर” महादेव कहा जाता है। भगवान शिव का श्रंगार 16 श्रंगार है। माता पार्वती का श्रंगार 16 श्रंगार है। चंद्रमा भी 16 कलाओं में पूर्ण होता है। भक्ति की शक्ति से ही यह सब कुछ समझना होगा। शिवमहापुराण आपको भगवान शिव की लीलाओं से ही नही जोड़ती बल्कि “शिव तत्व” के दर्शन भी कराती हैं।

पंडित प्रदीप मिश्रा ने आज सुगंधा के साथ ही “तमरुकेश्वर महादेव” और भगवान शिव के माता पार्वती सहित “अमरावती” आने के साथ ही भगवान और भक्त के बीच के अनेक प्रसंग रखते हुए श्रद्धालुओ को शिवमहापुराण के अनेक उपाय के साथ “एक लोटा जल” और “श्री शिवाय नमोस्तुभ्यम” के जाप की महिमा बताई। उन्होंने व्यास पीठ से ऐसे भक्तों के पत्र भी पढ़े जिन्हें “शिवमहापुराण” के उपायों से अपने जीवन के बड़े संकटो से ना केवल मुक्ति मिली बल्कि डॉक्टर्स के जवाब देने के बाद भी बीमारी से मुक्ति और विवाह के वर्षो बाद “संतान” सुख मिला है।

पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि विदर्भ राज्य की अमरावती  में भगवान शिव और माता पार्वती ने चौसर खेली थी। यहां  उन्हें पांच पुत्रियों जया, विषहरा, श्यामली, दोउतली और देव की प्राप्ति हुई थी। ये पांचों पुत्रियां जलाधारी के रूप में भगवान शिव के साथ रहती है। यदि कोई व्यक्ति “अनिद्रा” का शिकार हैं तो इनका ध्यान कर अनिद्रा से मुक्ति पा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने निसंतान दंपती के लिए सफेद “आंकड़े” की जड़ का प्रयोग भी बताया वही पशुपति व्रत और सोलह सोमवार व्रत की महत्ता भी बताई।

पंडित प्रदीप मिश्रा ने व्यास पीठ से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की छिन्दवाड़ा में  स्किल सेंटरों की स्थापना और उससे युवाओ को बनने वाले कैरियर  के लिए तारीफ की और कहा कि अपने क्षेत्र ,प्रदेश ,देश के लिए ऐसे प्रयास जरूरी है। कथा में उमड़ रहे श्रद्धालुओ के “सैलाब” का भी उन्होंने जिक्र करते हुए कहा कि इतना बड़ा आयोजन और उसकी व्यवस्था संभालना भी  पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के ही बस की बात है।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और सांसद नकुलनाथ का छिन्दवाड़ा में यह दूसरा बड़ा “धार्मिक” आयोजन हैं। इसके पूर्व उन्होंने इसी स्थल पर पिछले माह 5,6,7 अगस्त को “बागेश्वरधाम सरकार” धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के माध्यम से “हनुमान कथा” का आयोजन किया था। छिन्दवाड़ा में  इतने बड़े स्तर के धार्मिक आयोजन से आयोजक भी गद- गद है और श्रद्धालु भी  खुश है।


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