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अमरवाड़ा विधानसभा सीट खाली, कमलेश शाह का इस्तीफा मंजूर, सितम्बर में होंगे उपचुनाव

हारे - जीते सब नेता भाजपा में , कांग्रेस को तलाशना पड़ेगा नया नेता

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भाजपा के लिए विनिंग एंकर है अमरवाड़ा सीट

♦छिन्दवाड़ा मध्यप्रदेश –

अमरवाड़ा के विधायक राजा कमलेश शाह के विधायक पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस से भाजपा में शामिल हो जाने के कारण यह सीट खाली हो गई है। अब नए विधायक के लिए यहां पांच माह बाद सितंबर में  उपचुनाव होगे। विधानसभा  सचिवालय ने अमरवाड़ा सीट के खाली होने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। भाजपा के लिए यह छिन्दवाड़ा से सबसे बड़ी ज्वाइनिंग मानी जा रही है कि एक विधायक ने 6 माह पहले ही विधायक निवाचित होने के बाद विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा है।

राजा कमलेश शाह के भाजपा में आने से अमरवाड़ा सीट के राजनैतिक समीकरण ही बदल गए हैं। जायज ही है कि चुनाव हुए तो राजा कमलेश शाह ही भाजपा के उम्मीदवार होंगे। कमलेश शाह अमरवाड़ा से लगातार तीन बार के विधायक है। उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए भाजपा के  प्रेमनारायण ठाकुर, फिर उनके पुत्र उत्तम ठाकुर और 6 माह पहले ही हुए विधानसभा चुनाव में गोंडवाना से  भाजपा में आई मोनिका बट्टी को करीब 25 हजार वोट से पराजित किया है। अब सवाल यह है कि अमरवाड़ा में हारने – जीतने वाले नेता एक ही दल भाजपा में है तब भाजपा को  यहां बड़ा फायदा होना निश्चित ही है। यहां नेताओ के बीच समन्वय बना रहे इसको  लेकर भाजपा को कोई रास्ता  भी निकालना होगा। इन हालातों में तो  वर्तमान में कांग्रेस यहां खाली हो गई है। कांग्रेस को  अमरवाड़ा के लिए नया आदिवासी नेता तैयार करना पड़ेगा।

29 सितंबर के पहले नए विधायक का निर्वाचन

विधायक कमलेश प्रताप शाह ने 29 मार्च को इस्तीफा दिया था और विधानसभा सचिवालय ने 30 मार्च की डेट में इस्तीफे की मंजूरी के बाद अब चुनाव आयोग को 29 सितम्बर के पहले विधायक के लिए यहां उप चुनाव कराना पड़ेगा। विधानसभा की कोई भी सीट अधिकतम 6 माह तक ही खाली रखी जा सकती हैं। इस सीट पर अधिकतम कांग्रेस का ही कब्जा रहा है। पहले राजा कमलेश शाह की माता रानी शैल कुमारी, फिर प्रेम नारायण ठाकुर यहां से लगातार विधायक रहे हैं। 2004 के चुनाव में यहां गोंडवाना के मनमोहन शाह बट्टी विधायक बने थे। इसके बाद 2008 में भाजपा से प्रेमनारायण ठाकुर और फिर 2013, 2018 से लेकर 2023 से लगातार कमलेश शाह यहां के विधायक चुने गए हैं। बड़ी बात यह भी है कि पिछले लोकसभा चुनाव में सांसद नकुलनाथ अमरवाड़ा सीट से मिली 22 हजार वोटो को लीड की वजह से ही सांसद बन पाए थे। गौरतलब है कि नकुलनाथ मात्र 37 हजार 622 वोट से ही सांसद बने थे। वे छिन्दवाड़ा लोकसभा की चार सीट परासिया, सौसर, पांढुर्ना और चौरई से हार गए थे।। केवल तीन सीट छिन्दवाड़ा जुन्नारदेव और अमरवाड़ा के भरोसे ही सांसद बन पाए थे जिसमें अकेले अमरवाड़ा की लीड करीब 22 हजार वोट की थी।

इस मायने में अमरवाड़ा को अब भाजपा  भी विनिंग एंकर मान  रही  है।  यहां के कांग्रेस विधायक कमलेश शाह का  भाजपा में आना भाजपा की रणनीति  का बड़ा हिस्सा है। राजा कमलेश शाह के भाजपा में शामिल होने से सांसद नकुलनाथ के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। माना जा रहा है कि  इसी बात से बौखलाकर सांसद नकुलनाथ ने आदिवासी नेता कमलेश शाह को गद्दार और बिकाऊ जैसे अपशब्द आम सभा मे कह डाले है। अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में ही जिले का सबसे बड़ा आदिवासी वोट बैंक है। इस वोट बैंक के दम पर राजनीति में चमकने वाले विनर  कमलेश शाह के साथ ही भाजपा के उत्तम ठाकुर और गोंडवाना की मोनिका बट्टी अब भाजपा में है।अब जब तीनो नेता एक साथ होंगे तो यहां भाजपा को मिलने वाली बड़ी लीड भाजपा प्रत्याशी विवेक बंटी साहू की भी जीत का रास्ता खोल सकती है। अमरवाड़ा में  कुल वोटर 2 लाख 57 हजार से ज्यादा है। इनमे 80 प्रतिशत वोटर आदिवासी वर्ग का बताया गया है जिसमे करीब 1 लाख 29 हजार पुरुष और 1 लाख 28 हजार महिलाएं है।


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