रेलवे सुधार की जोरदार पहलः छिंदवाड़ा से नई ट्रेनों और स्टेशन अपग्रेड की मांग तेज

छिंदवाड़ा। जिले में रेलवे सुविधाओं के विस्तार और ट्रेनों की कमी को लेकर अटल बिहारी वाजपेयी प्रेरणा मंच एवं ब्रॉड गेज रेल संघर्ष समिति ने संयुक्त रूप से रेल अधिकारियों को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने चेतावनी दी कि मांगों का समय पर निराकरण न हुआ तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ज्ञापन के अनुसार छिंदवाड़ा स्टेशन और आस-पास के रेलवे ढांचे में कई वर्षों से सुधार की जरूरत महसूस हो रही है। यात्रियों की बढ़ती संख्या व लगातार हो रही असुविधाओं को देखते हुए 13 प्रमुख बिंदुओं पर तत्काल कार्यवाही की माँग की गई।
संगठनों ने मेमो ट्रेनों (61123, 61124, 61125, 61126) में अतिरिक्त कोच जोड़ने, महिला कोच शुरू करने और महिला RPF तैनाती की मांग उठाई। उनका कहना है कि इन ट्रेनों में महिला कर्मचारियों और छात्राओं की संख्या अधिक है तथा असामाजिक तत्वों के कारण सुरक्षा का माहौल कमजोर रहता है।
इंदौर–नैनपुर चलने वाली पैंचवेली सुपरफास्ट (19343/19344) में बदलाव का सुझाव भी दिया गया। प्रस्ताव के अनुसार ट्रेन को तीन दिन मंडला और चार दिन बालाघाट भेजा जाए, साथ ही उसे उन्नत करके इंदौर तक भेजा जाए। इसके अलावा ट्रेन में AC-2 और AC-3 टियर कोच तथा छिंदवाड़ा कोटा बढ़ाने की भी मांग रखी गई।
पातालकोट फास्ट ट्रेन (20423/20424) को सफदरजंग की जगह नई दिल्ली स्टेशन तक विस्तार देने और वापसी में तीन दिन गौंडिया तथा तीन दिन मंडला तक चलाने की माँग पेश की गई। संगठनों का कहना है कि कोचों की गुणवत्ता, साफ-सफाई और IRCTC सेवाओं में भी सुधार जरूरी है।
स्टेशन के आसपास PWD रोड का चौड़ीकरण, बार-बार लगने वाले जाम और दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए तुरंत सड़क विस्तार की जरूरत बताई गई। स्टेशन के बाहर ट्रैफिक अव्यवस्था और ऑटो चालकों की मनमानी पर भी अंकुश लगाने की माँग की गई।
संगठनों ने बताया कि स्टेशन पर बने ओवरब्रिज में एस्केलेटर और लिफ्ट न होने से वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं को परेशानी होती है, इसलिए इन्हें जल्द लगाया जाए। प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर सिटी पुलिस की यातायात चौकी बनाने की आवश्यकता भी बताई गई है।
इसी तरह धार्मिक जुलूसों और वार्षिक आयोजनों के प्रमुख मार्ग पर रेलवे द्वारा किए जा रहे प्रस्तावित निर्माण को अन्य स्थान पर शिफ्ट करने की माँग की गई, ताकि भीड़भाड़ वाले त्योहारों में हजारों लोगों की आवाजाही सुरक्षित रह सके।
अंत में संगठनों ने कहा कि यदि इन माँगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्र के सामाजिक संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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