“सच्ची पत्रकारिता संकट में, फर्जी प्रेस कार्ड गैंग एक्टिव – जनता का भरोसा डगमगाया!”
मंडला। कभी लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाली पत्रकारिता आज मंडला जिले में कुछ लोगों की हरकतों से सवालों के घेरे में है। सच्चे पत्रकार जहाँ जोखिम उठाकर भी जनता के हक में लड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर प्रेस लिखे वाहनों और नकली पहचान के सहारे कुछ फर्जी पत्रकार अवैध वसूली को ही पेशा बना बैठे हैं।
मामला बीजाडांडी थाना क्षेत्र का है, जहां हेलमेट चेकिंग के दौरान हल्के पीले रंग की स्कूटी पर “प्रेस” चिपकाकर दो युवक पहुँचे। दोनों ने ASI से सीधे कहा—“सर, आप ही खर्चा पानी दे दो।” जब मना किया गया तो टीआई को फोन मिलाकर खुद को मंडला का पत्रकार बताने लगे।
ऐसे मामलों की संख्या मंडला में लगातार बढ़ रही है। कई यूट्यूबर और वेबपोर्टल कर्मी गांव-गांव जाकर घपलों की जानकारी इकट्ठी करने के नाम पर लोगों को भरोसे में लेते हैं, और फिर खबर दबाने के बदले वसूली करते हैं। कई सर्पमित्र और बेरोजगार युवक भी अब खुद को पत्रकार बताकर यही धंधा चला रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि असली मुद्दे उठाने वाले गिने-चुने पत्रकार ही सक्रिय हैं, जबकि बिना रजिस्ट्रेशन के प्रेस आईडी और माइक लेकर घूमने वालों की संख्या सड़कों पर अधिक दिखती है।जनता और कई अधिकारी भी अब ऐसे ‘खर्चा-पानी पत्रकारों’ से परेशान हो चुके हैं।
इसको देखते हुए पत्रकारिता जगत ने जिला प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि फर्जी प्रेस, गैर-रजिस्टर्ड चैनलों और वेबपोर्टल पत्रकारों की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सच्चे और निष्पक्ष पत्रकारों की छवि सुरक्षित रह सके।
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सोर्स – रेवांचल टाइम्स ।

















