विश्व मंच पर गूंजेगी छिंदवाड़ा की रामलीला, 11 देशों के बीच दिखेगा भारतीय संस्कारों का वैभव।

मेट्रो सिटी मीडिया | जबलपुर/छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा की समृद्ध लोकनाट्य और सांस्कृतिक परंपरा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने जा रही है। जिले की ऐतिहासिक पहचान श्रीरामलीला मंडल, छिंदवाड़ा को 4th World Ramayana Conference में एक दिवसीय रामलीला मंचन हेतु विशेष आमंत्रण प्राप्त हुआ है। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2 से 4 जनवरी 2026 तक जबलपुर (मध्यप्रदेश) में आयोजित होगा।
यह भव्य सांस्कृतिक आयोजन ब्रह्मऋषि मिशन समिति, जबलपुर एवं राम अवेयरनेस मूवमेंट के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न होगा, जिसे श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास और संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन का संरक्षण प्राप्त है। सम्मेलन की खास बात यह है कि इसे एक महान रामायण विद्वान एवं रामभक्त की स्मृति को समर्पित किया गया है, जिससे आयोजन को वैचारिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गरिमा प्राप्त हो रही है।
11 देशों की सहभागिता, एक मंच पर रामकथा की वैश्विक झलक
अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन में 11 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। सांस्कृतिक सत्रों के दौरान छिंदवाड़ा की रामलीला के साथ इंडोनेशिया की प्रसिद्ध रामलीला और मणिपुर की पारंपरिक रामलीला का भी मंचन होगा। इससे दर्शकों को एक ही मंच पर रामकथा की विविध और वैश्विक परंपराओं के दर्शन होंगे।
समापन समारोह में भावनाओं का महासंगम
सम्मेलन के समापन अवसर पर श्रीरामलीला मंडल, छिंदवाड़ा द्वारा रामकथा के दो अत्यंत मार्मिक प्रसंग—दशरथ देहत्याग एवं भरत-राम मिलाप—का मंचन किया जाएगा। ये प्रसंग रामायण के भावनात्मक शिखर माने जाते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के समक्ष भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और आध्यात्मिक संदेशों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेंगे।
1889 से निरंतर जीवित परंपरा
उल्लेखनीय है कि श्रीरामलीला मंडल, छिंदवाड़ा वर्ष 1889 से निरंतर रामलीला मंचन की परंपरा का निर्वहन कर रहा है। हाल ही में अयोध्या धाम में हुए ऐतिहासिक मंचन के पश्चात मंडल को मिला यह अंतरराष्ट्रीय आमंत्रण, छिंदवाड़ा की लोकनाट्य परंपरा के लिए गर्व का विषय है।
विश्व मंच पर छिंदवाड़ा की विरासत
मंडल के संरक्षक कस्तूरचंद जैन, राजू चरणागर एवं सतीश दुबे लाला ने बताया कि यह सहभागिता केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि छिंदवाड़ा की समृद्ध विरासत को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने का सशक्त अवसर है। इसके माध्यम से रामकथा के मानवीय, नैतिक और आध्यात्मिक संदेश वैश्विक संवाद का हिस्सा बनेंगे।
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