केंद्रीय बजट पर सियासी संग्राम: भाजपा ने बताया ‘विकसित भारत का रोडमैप’, कांग्रेस बोली—छिंदवाड़ा फिर अनदेखा।

छिंदवाड़ा मेट्रो सिटी मीडिया |
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट को लेकर छिंदवाड़ा में राजनीतिक तापमान तेज हो गया है। एक ओर भाजपा सांसद बंटी विवेक साहू ने बजट को “विकसित और आत्मनिर्भर भारत” की दिशा में मजबूत कदम बताया, वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष विश्वनाथ ओकटे ने इसे आम जनता के लिए निराशाजनक और छिंदवाड़ा के साथ अन्याय करार दिया है।
भाजपा सांसद बंटी विवेक साहू ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट निर्णय, सुधार और जनकल्याण की स्पष्ट सोच को दर्शाता है। उनके अनुसार 12.2 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश से भारत 2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कैंसर रोगियों के लिए दवाओं पर सीमा शुल्क छूट, दुर्लभ रोगों के उपचार में राहत, युवाओं के लिए शिक्षा व कौशल विकास, एमएसएमई के लिए विशेष फंड, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और तिलहन व मत्स्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे प्रावधानों को ऐतिहासिक बताया। सांसद ने कहा कि यह बजट गांव, गरीब, युवा और महिलाओं को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है।
वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष विश्वनाथ ओकटे ने बजट पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह बजट कागजी आंकड़ों तक सीमित है और जमीनी स्तर पर आम जनता को कोई वास्तविक राहत नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार भी छिंदवाड़ा जिले के लिए न कोई नई योजना लाई गई और न ही कोई विशेष बजटीय प्रावधान किया गया। ओकटे ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय हर बजट में छिंदवाड़ा को योजनाओं और विकास कार्यों के लिए विशेष पैकेज मिलता था, लेकिन भाजपा सरकार में जिले की लगातार उपेक्षा हो रही है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि बजट में युवाओं के रोजगार, किसानों की आय, महंगाई और मध्यम वर्ग को टैक्स राहत जैसे मुद्दों पर ठोस प्रावधान नजर नहीं आते। उन्होंने दावा किया कि बजट पेश होते ही शेयर बाजार में गिरावट यह दर्शाती है कि यह बजट आम जनता नहीं, बल्कि चुनिंदा वर्गों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
दोनों दलों के बयानों के बाद छिंदवाड़ा में बजट को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। भाजपा इसे विकास और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे जनविरोधी और जिले के साथ भेदभाव करार दे रही है। आम नागरिकों के बीच भी यह सवाल चर्चा में है कि क्या बजट के बड़े दावों का लाभ वास्तव में जमीनी स्तर तक पहुंचेगा या नहीं।
केंद्रीय बजट को लेकर भाजपा के विकास दावों और कांग्रेस के विरोध के बीच, क्या छिंदवाड़ा को वास्तव में इसका ठोस लाभ मिल पाएगा?


















